जान है जहान है......
जीवन है तो संसार भर की गतिविधियां खुशियां देती हैं।यह सच है कि कोरोनावायरस जहां काल बनकर सिर पर सवार है , वहीं यह कहना भी गलत नहीं होगा कि आज संसार संकट की इस घड़ी में एक सूत्र में बंध गया है। यदि ऐसा पहले से ही होता और धरती पर सभी एक परिवार के सदस्यों की तरह मिल कर रहते तब न तो दो -दो विश्व युद्ध होते न ही जैविक हथियार होते और न ही जन -जीवन को कुप्रभावित करने वाली योजनाएं। जिस कोरोनावायरस से निर्दोष मर रहे हैं । संसार में हाहाकार मचा हुआ है उससे एक ही बात सामने आती है कि- मरने वाले तो बेमौत मर गए,मर रहे हैं, पर मारने वाला बचा रहेगा ? यह गलत सोच है। आज कोरोनावायरस के इतिहास से जुड़ी अनेक उक्तियां पढ़ने को मिल रही हैं।
समय रहते उन पर ध्यान दिया जाता तो शायद यह महामारी अस्तित्व में न आती। पर अब जब महामारी अपने विकराल रूप में तांडव कर रही है तो सावधानी बरतने के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय नहीं।घर में रहिए , परिवार से जुड़िए,काम काज की व्यस्तता ने जीवन के जो क्षण छीन लिए थे उनके साथ जी कर देखिए। कुछ नहीं तो सर्व कल्याण के लिए प्रार्थना करते हुए आश्वस्त हो जाइए कि जीने के लिए संयम आवश्यक है । संयम के लिए त्याग। अत: सरकार द्वारा लागू की गई हर योजना का पालन करते हुए चिरंजीवी बनिए और मन में बैठा लीजिए कि --जान है जहान है।
द्वारा----
विभा कुमारिया शर्मा
लुधियाना (पंजाब)
