किसी के दुख का कारण न बनें .

 

हर इंसान यह तो चाहता है कि उसकी वजह से सबको खुशी मिले…मगर सच यह है कि हम हमेशा किसी का सुख बढ़ा पाएँ, ये ज़रूरी नहीं। ज़िंदगी में कई बार हमारी क्षमता, हमारा वक़्त, या हालात साथ नहीं देते।
लेकिन… एक बात हमेशा हमारे हाथ में होती है—
हम किसी का दुख न बढ़ाएँ। हमारी एक मीठी बात, किसी का दिन संवार सकती है �"र एक कड़वी बात… दिल तोड़ सकती है।
कभी हम समझे बिना किसी को जज कर देते हैं,
कभी जल्दबाज़ी में ऐसे शब्द कह देते हैं जो तीर बन जाते हैं।

तो चलिए…
खुशियाँ ज़रूर बाँटें, अगर संभव हो।
पर कम से कम इतना तो करें—
किसी को दर्द न दें।

* ललित बेरी