यूं ही नहीं मिले, तकदीर ने कराया है मेल.
कहते हैं कि दोबारा जन्म होता है और आत्माएँ फिर मिलती हैं।
हमारी ज़िंदगी में कुछ लोग बिना बुलाए आते हैं, और दिल में गहरी जगह बना जाते हैं।
सोचिए…
दुनिया की इस भीड़ में, लाखों-करोड़ों लोग होते हुए भी कुछ ही चेहरे ऐसे होते हैं जिन्हें देखते ही अपनापन महसूस होता है।
ये वही रिश्ते होते हैं... जिनका धागा सिर्फ इस जन्म का नहीं, बल्कि पिछले जन्मों से बंधा होता है।
वो हमें समझ लेते हैं, हमारे दुःख, तकलीफ़, ख़ामोशियाँ… सब पढ़ लेते हैं।
जो दिल के इतने करीब हों, वो संयोग नहीं ... तक़दीर या कर्मों का लिखा होता है।
इसलिए रिश्तों को संभालिए…क्योंकि हर मिलने वाला इंसान पिछले जनम की कोई कहानी दोहराने आता है।
_ ललित बेरी
