अभिमान नहीं सम्मान चुनें .

अभिमान तब आता है, जब हमें लगता है कि हमने कुछ किया है!
पर सम्मान तब मिलता है, जब दुनिया को लगता है कि आपने कुछ किया है।
अभिमान — क्षणिक होता है, जो मन को ऊँचा करता है पर रिश्तों को छोटा कर देता है।
वहीं सम्मान — स्थायी होता है, जो चरित्र, कर्म और विनम्रता से अर्जित होता है।
जीवन की असली सफलता यही है — जब आपकी मौजूदगी में नहीं, बल्कि आपकी अनुपस्थिति में भी लोग आपको याद करें…
सम्मानपूर्वक!

_ललित बेरी