पहचान.

किसी ने बहुत सुंदर कहा है —
“स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नीयत हो, तो इंसान बहुत कुछ सीख सकता है।”
ज़िंदगी का असली विकास तब शुरू होता है, जब हम अपनी गलतियों से भागते नहीं, बल्कि उन्हें अपनाकर बेहतर बनने की कोशिश करते हैं।

आज के दौर में लोग यह गिनते हैं कि कितने लोग हमें जानते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मायने यह रखता है कि क्यों जानते हैं।
अगर हमारी पहचान ईमानदारी, वफ़ादारी और अच्छे कर्मों से है —
तो वही पहचान स्थायी बन जाती है।

याद रखिए —
पहचाने जाने से बड़ा है पहचान का कारण।
यही कारण तय करता है कि हम बस मशहूर हैं… या वाक़ई सम्मानित।

ये ललित बेरी