हल्के में ले रहे वबा को .

कुछ देश के दुश्मन देश में हैं

वे जनता के ही वेश में हैं

घूम रहे हैं गलियों सड़कों पे 

अरे आराम करो..संदेश में है


क्या कहें इनकी अना को 

हल्के में ले रहे वबा को 

अगर कहर यहां बरपा तो

न समझाने को कुछ शेष में है


यूँ न इस चमन को दमन करो 

इस क़दग़न पर भी मनन करो 

अरे कुछ तो यारो यत्न करो 

अब ये वबा आवेश में है


क्या भूमिका अदा करें हम..! 

घर बैठे ही जफा करें हम

प्रशासन को न खफा करें हम

न ये जनता के द्वेष में हैं


   - - गुरवीर - -