निर्जीव .
किस चीज़ की अकड़ करे ए सजीव
जाना है यहां सभी को निर्जीव
ये धरती है निर्जीव
फिर भी कितना बोझ उठाती है
इंसान नहीं करे कभी इसकी तारीफ
ये धरती मां कहलाती है
ये हवा है निर्जीव
जो सांस हमें दिए जाती है
बोलती नहीं है ये कुछ भी
मुफ्त का काम किए जाती है
ये पानी भी है निर्जीव
सभी की प्यास बुझाता है
देखता ना ये धर्म और जाती
बस अपना काम पहचानता है
ये आसमान भी है निर्जीव
कुदरत को जो दर्शाता है
इतना सुन्दर है ये संसार
फिर खुदपर क्यू तू इतराता है?
ये गरीबी है निर्जीव
जो असलियत हमें दर्शाती है
थोड़ा होने पर कौन है अपना
ये हमें दिखलाती है
ये अमीरी है निर्जीव
जो काबिलियत हमारी बताती है
कैसे करेंगे भला किसी का
ये हुनर हमें सिखाती है
ये अग्नि भी है निर्जीव
जो मुर्दों को आग दिए जाती है
ज़िन्दगी का कड़व सच क्या है
ये हमें बतलाती है
ये प्यार भी है निर्जीव
जो ममता हमें सिखाती है
जन्म लेता है जब बच्चा
तो मा प्यार से सहलाती है
ये भूख भी है निर्जीव
जो रोटी कमाना सिखाती है
कैसे मिले अन्न और दाना
एक चिड़िया भी हमें समझाती है
ये दया भी है निर्जीव
जो इंसानियत हमें सिखाती है
कैसे करें हम लोगों की सेवा
ये हमें बतलाती है
किस चीज़ की अकड़ करे ए सजीव
जाना है यहां सभी को निर्जीव
Anmol Siyal
