मार कर अपनी इंसानियत को,
तू निर्जीव ना बन,
कर इरादा कुछ कर गुजरने का,
यू तू अपनी जिंदगी बर्बाद ना कर।
आए चाहे कोई भी रुकावट इस राह में,
इरादों को अपने तू कमजोर न कर,
कायम कर मिसाल अपनी,
- दीपक ठाकुर